Skip to main content

डर अक्सर हमारे मन की उपज होती है...

सुविचार...✍


डर अक्सर हमारे मन की उपज होती है,

जो असल में मौजूद ही नहीं होता है।


जब हम अपनी सोच का दायरा बढ़ाते हैं तभी हमें,

अपनी असली काबिलियत का पता चलता है।


इसलिए निराशा के पिंजरे से बाहर निकलिए,

क्योंकि डर से जीतना ही सिकंदर बनने की शुरुआत

है।

Comments

Popular posts from this blog

हम जीवन में चाहे कितनी भी ऊंचाइयों...

सुविचार...✍ हम जीवन में चाहे कितनी भी ऊंचाइयों को छू लें, हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। क्योंकि हर व्यक्ति की शुरुआत और अंत, जमीन से शुरू होकर जमीन पर ही खत्म होता है।

अगर हम अपनी मिठास बनाए रखे तो...

सुविचार...✍ अगर हम अपनी मिठास बनाए रखे तो जलने वालों की जलन अपने आप उनके लिए 'परहेज' बन जाएगी। इसलिए आप अपनी चमक बरकरार रखिए, क्योंकि जो आज आपकी रोशनी से परेशान हैं, कल वही आपकी तारीफ करने को मजबूर होंगे।

बदला लेने के बजाय धैर्य रखना और सही...

सुविचार...✍ बदला लेने के बजाय धैर्य रखना और सही समय का इंतजार करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता है, क्योंकि जो जैसा बोता है, वैसा ही काटता है।