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Showing posts from March, 2026

जैसे प्लेट में खाना रहने तक वह मूल्यवान...

सुविचार...✍ जैसे प्लेट में खाना रहने तक वह मूल्यवान लगती है, लेकिन खाना खत्म होते ही प्लेट गंदी लगने लगती है। वैसे ही जब लोगों का मतलब पूरा हो जाता है तो उन्हें, अच्छाइयों की जगह सिर्फ कमियां ही नजर आती हैं।

जब आपकी शख्सियत का सूरज चमकता...

सुविचार...✍ जब आपकी शख्सियत का सूरज चमकता है, तो कुछ लोगों की आंखों में चुभन होना लाज़मी है। पत्थर हमेशा फलदार पेड़ को ही नसीब होते हैं, बेजान और सूखे पेड़ों को कोई नहीं पूछता है।

पत्थर एक बार मंदिर में जाकर...

सुविचार...✍ पत्थर एक बार मंदिर में जाकर, और तराश कर 'भगवान' बन गया लेकिन इंसान रोज मंदिर जाकर भी, 'इंसान' नहीं बन पाया और पत्थर ही रहा।

क्रोध आने पर लोगों पर गुस्सा करने के...

सुविचार...✍ क्रोध आने पर लोगों पर गुस्सा करने के बजाय, अपने मन को शांत करने पर ध्यान दें। मुसीबत आने पर हताश होकर खुद को न कोसें, बल्कि समय के बदलने का इंतजार करें। क्रोध में स्वयं पर काबू और मुसीबत में, धैर्य बनाए रखना ही असली जीत है।

अगर लोग अपनी सोच और आदतों को...

सुविचार...✍ अगर लोग अपनी सोच और आदतों को भी उतनी ही फुर्ती से सुधारें जितनी तेजी से अंधविश्वास के डर से उल्टी चप्पल सीधी करते हैं, तो दुनिया का नजारा वाकई कुछ और ही होगा।

मेहनत का फल कभी बेकार नहीं जाता...

सुविचार...✍ मेहनत का फल कभी बेकार नहीं जाता, वह या तो सफलता के रूप में मिलता है या फिर एक ऐसे अनुभव के रूप में, जो भविष्य की नींव मजबूत करता है।

जीवन को बेहतर बनाने के लिए हमें...

सुविचार...✍ जीवन को बेहतर बनाने के लिए हमें अपनी, सोच और आदतों को खुद बदलना पड़ता है। जैसे घर की सफाई हमें खुद ही करनी पड़ती है, वैसे ही मन की सफाई ही असली बदलाव लाती है।

चप्पल महीनों तक हमारे पैरों की सुरक्षा...

सुविचार...✍ चप्पल महीनों तक हमारे पैरों की सुरक्षा करते हैं, लेकिन जैसे ही पैर फिसलकर दुर्घटना होती है तो, हम अपने संतुलन या गलती को स्वीकार करने के बजाय, सारा दोष चप्पल के पुराने या खराब होने पर मढ़ देते हैं।

डर अक्सर हमारे मन की उपज होती है...

सुविचार...✍ डर अक्सर हमारे मन की उपज होती है, जो असल में मौजूद ही नहीं होता है। जब हम अपनी सोच का दायरा बढ़ाते हैं तभी हमें, अपनी असली काबिलियत का पता चलता है। इसलिए निराशा के पिंजरे से बाहर निकलिए, क्योंकि डर से जीतना ही सिकंदर बनने की शुरुआत है।

दिखावे की दुनिया में जीना न केवल...

सुविचार...✍ दिखावे की दुनिया में जीना न केवल मानसिक तनाव बढ़ाता है, बल्कि इंसान को आर्थिक दलदल में भी धकेल देता है। क्योंकि बाहरी चमक-धमक बनाए रखने के लिए लोग अक्सर अपनी, हैसियत से ज्यादा खर्च करते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।

दस जाहिल मिलकर एक विद्वान को हरा...

सुविचार...✍ दस जाहिल मिलकर एक विद्वान को हरा नहीं सकते, लेकिन उसे चुप जरूर करा सकते हैं। क्योंकि लोग अक्सर वही सुनना पसंद करते हैं, जो उनके मौजूदा विचारों से मेल खाता हो।

जहाँ चालाकी को ही हुनर मान लिया जाए...

सुविचार...✍ जहाँ चालाकी को ही हुनर मान लिया जाए, वहाँ ईमानदारी अक्सर कमजोरी समझी जाती है। ऐसे में खुद को साबित करने से बेहतर है कि चुपचाप वहां से निकल जाया जाए।